चट्टान के प्रकार एवं उसके विशेषताएँ तथा उसकी बनावट

Share with friends

चट्टान के प्रकार एवं उसके विशेषताएँ तथा उसकी बनावट

चट्टान 

चट्टान के प्रकार एवं उसके विशेषताएँ तथा उसकी बनावट

चट्टान के प्रकार एवं उसके विशेषताएँ तथा उसकी बनावट

पृथ्वी के सतह के निचे या पृथ्वी के सतह के ऊपर ऊँचे उठे कठोर भाग को चट्टान कहा जाता है। पृथ्वी के उपरी सतह को प्रपटी कह जत है। पृथ्वी की ऊपरी सतह मुख्य रूप से आठ पदार्थों से मिलकर बानी होती है। जिसमे ऑक्सीजन की मात्रा 46% तथा सिलिकॉन की मात्रा 27% होती है। तथा एल्युमीनियम की मात्रा 8% होती है।

चट्टान के प्रकार

चट्टान मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है।

आग्नेय चट्टान :- पृथ्वी के अंदर से ज्वालामुखी के माध्यम से जो भी पदार्थ बाहर आता है उसे लावा या मैग्मा कहा जाता है। और ये पदार्थ पृथ्वी के सतह पर आकर जैम जाता है, इसे ही आग्नेय चट्टान कहा है। इससे यह है की आग्नेय चट्टान का निर्माण पृथ्वी के अंदर से निकलने वाले लावा या मैग्मा से होता हैं। यह इतना गर्म होता है की इसके संपर्क में जो भी जीवाश्म आता है उसे यह जलाकर राख कर देता है। इसीलिए इसप्रकार के चट्टान में जीवाश्म से अंश नहीं पाए जाते हैं।

ज्वालामुखी के द्वारा जब लावा बाहर आकर जैम जाता है, या किसी कारणवश वह पृथ्वी के अंदर ही जैम जाता है। इसीलिए इसे दोनों जगहों पर अलग अलग नाम से जाना जाता है। तो इसे कभी कभी लावा का पठार कहा जाता हैं।
जब से लावा पृथ्वी के ऊपरी सतह पर कठोर रूप में है तो इसे बेसाल्ट चट्टान कहा जाता है। वही जब ये लावा किसी कारणवश अंदर ही जम जाता है तो इसे ग्रेनाइट चट्टान कहा जाता है।

जब ये लावा किसी कारणवश पृथ्वी के अंदर एक बड़े से ठोस गुम्बंदनुमा आकार ले लेता है तो इसे बैकोलिथ कहा जाता है। तथा जब यह छतरीनुमा आकार का ठोस रूप लेता है तो इसे लैकोलिथ कहा जाता है। लेकिन जब यह एक धारीदार रूप ले लेता है तो इसे फैंकोलिथ कहा जाता हैं। और वही जब ये लावा जमींन के अंदर किसी दरार में फंस कर ठोस रूप ले लेता है तो इसे डाईक कहा जाता हैं।

आग्नेय चट्टान की विशेषताएँ

1. यह काफी कठोर होता है। चुकी यह लावा के रूप में बाहर आता है और बाहर के ताप एवं दाब के कारण यह काफी कठोर हो जाता हैं।
2 . ये चट्टान जीवाश्मरहित होते है, जीवाश्मरहित होने का तात्पर्य यह है की यह इतना गर्म होता है की जो भी जीवाश्म इसके संपर्क में आता है यह उसे जलाकर राख कर देता है।
3 . जितने भी बहुमूल्य धातु जैसे की सोना, लोहा, कोबाल्ट, निकेल, ताम्बा आदि इसी चट्टान से पाया जाता है। उदहारण के लिए भारत के दक्षिणी इलाकों में तथा छोटा नागपुर के क्षेत्र में यह देखने को मिलता है।

अवसादी चट्टान :- इस चट्टान निर्माण अग्नेय चट्टान के टूटने फूटने से होता है। हवा, जल या किसी और माध्यम से अग्नेय चट्टान प्लेट के रूप में पृथ्वी के सतह पर बिछने लगता है। इस प्लेट को अवसाद है। इसी अवसाद के परत दर परत जमने से जिस चट्टान का निर्माण होता है उसी को अवसादी चट्टान कहा है। परत दर परत जमने के क्रम में बहुत से जीवाश्म इन्ही परतों के बिच फँस जाते है, इसीलिए अवसादी चट्टानों के बिच जीवाश्म का अंश पाया जाता है। इस चट्टान का निर्माण मुख्य रूप से निक्षेपण की प्रक्रिया द्वारा होता है।

अवसादी चट्टान की विशेषताएँ

1. अवसादी चट्टान जिवाश्मयुक्त होती है।
2 . ये चट्टानें परतदार होते है, चुकी इसके परतों के बिच जीवाश्म जमे होते है।
3 . कोयला, पेट्रोलियम, तेल आदि विशेष रूप से अवसादी चट्टान के अंदर पाया जाता है। भारत के दामोदर घाटी के क्षेत्र में से कोयला, एवं खनिज तेल निकाला जाता है।

रूपान्तरित चट्टान:- रूपान्तरण का मतलब ही होता है किसी एक पदार्थ का किसी दूसरे पदार्थ में परिवर्तन। ताप एवं दाब के कारण चट्टानों के अंदर कुछ रासायनिक प्रक्रिया चलती रहती है, जिसके परिणामस्वरूप ये चट्टानें छोटे छोटे टुकड़े में टूटने लगता है, और यह पृथ्वी के किसी सतह पर जमा होकर एक चट्टान का रूप ले इसी को रूपान्तरित चट्टान कहा जाता हैं।

रूपान्तरित चट्टान की विशेषताएँ

चुकी रूपान्तरित चट्टानों का निर्माण अग्नेय या अवसादी या या स्वयं रूपान्तरित चट्टान से ही होता है। तो चलिये देखते है की कौन सी चट्टान रूपांतरित होकर कौन से चट्टान का निर्माण करता है।

अग्नेय चट्टान

ग्रेनाइट चट्टान रूपांतरित होकर निस चट्टान का निर्माण करती है।
बेसाल्ट चट्टान रूपांतरित होकर सिल्ट चट्टान का निर्माण करती है।
गैब्रो चट्टान रूपांतरित होकर सरपेंटाइन चट्टान का निर्माण करती है।
बिटुमिनस कोयला चट्टान रूपांतरित होकर ग्रेफाइट चट्टान का निर्माण करती है।

अवसादी चट्टान

शैल चट्टान रूपांतरित होकर स्लेट चट्टान का निर्माण करती है।
चुना पत्थर चट्टान रूपांतरित होकर संगमरमर चट्टान का निर्माण करती है।
बलुआ पत्थर चट्टान रूपांतरित होकर क़्वार्टजाइट चट्टान का निर्माण करती है।
डोलोमाइट चट्टान रूपांतरित होकर संगमरमर चट्टान का निर्माण करती है।
लिग्नाइट कोयला चट्टान रूपांतरित होकर एन्थ्रासाइट कोयला चट्टान का निर्माण करती है।

रूपान्तरित चट्टान

स्लेट चट्टान रूपांतरित होकर फाईलाइट चट्टान का निर्माण करती है।
फाईलाइट चट्टान रूपांतरित होकर सिस्ट चट्टान का निर्माण करती है।

भारत एवं विश्व का भूगोल MCQ – CLICK HERE

Leave a Reply

error: Content is protected !!